
रसोई में रखा लाल सिलेंडर आमतौर पर चुपचाप खड़ा रहता है. लेकिन इन दिनों उसकी कीमत दुनिया की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक कहानी से जुड़ गई है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने सिर्फ मिसाइलों और युद्धपोतों को नहीं हिलाया. उसकी लहरें सीधे भारत की रसोई तक पहुंच गई हैं. नतीजा यह कि LPG सिलेंडर की कीमतें फिर ऊपर चढ़ने लगी हैं.
अगर आपको लगता है कि हजारों किलोमीटर दूर चल रही जंग का आपके घर से कोई रिश्ता नहीं, तो ऊर्जा बाजार का गणित कुछ और ही कहानी सुनाता है.
क्यों महंगी हो रही है रसोई गैस
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है. इस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. तेल और गैस से भरे जहाज आमतौर पर Strait of Hormuz के रास्ते भारत पहुंचते हैं. यही समुद्री रास्ता अभी दुनिया के सबसे संवेदनशील युद्ध क्षेत्रों में गिना जा रहा है. तनाव बढ़ने के बाद कई जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है.
इसका सीधा मतलब है ज्यादा समय, ज्यादा ईंधन खर्च ज्यादा शिपिंग लागत और आखिर में यही बढ़ा हुआ खर्च गैस सिलेंडर की कीमत में जुड़ जाता है.

बीमा और शिपिंग का महंगा खेल
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञ बताते हैं कि सिर्फ दूरी ही समस्या नहीं है. युद्ध क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों का War Risk Insurance कई गुना महंगा हो गया है. शिपिंग कंपनियां अब अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क वसूल रही हैं. जब जहाज महंगा पड़ेगा तो उसमें आने वाला LPG भी महंगा होगा. इसका असर सीधे घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर पर दिखने लगता है.

शहरों में क्या है आज गैस का रेट
ताजा बदलाव के बाद देश के बड़े शहरों में LPG की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. घरेलू सिलेंडर में औसतन 60 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई है. वहीं कमर्शियल सिलेंडर लगभग 144 रुपये तक महंगे हुए हैं. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और लखनऊ जैसे शहरों में रेट अब 900 से 1000 रुपये के बीच पहुंच चुके हैं.
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत कई शहरों में 2000 रुपये के करीब जा पहुंची है.
सरकार की रणनीति क्या है
ऊर्जा संकट की आशंका के बीच भारत सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है. पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात कर आपूर्ति रणनीति पर चर्चा की. सूत्रों के मुताबिक सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक आयात स्रोत तलाशने की योजना बनाई है. अमेरिका और रूस से अतिरिक्त सप्लाई पर भी विचार किया जा रहा है.
ऊर्जा बाजार की नजर अब आने वाले कुछ हफ्तों पर टिकी है. अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ता है, तो गैस की कीमतों में और उछाल संभव है. हालांकि सरकार की कोशिश है कि सप्लाई चेन को स्थिर रखा जाए ताकि आम लोगों पर बोझ सीमित रहे. लेकिन एक बात साफ है. दुनिया की भू-राजनीति और भारत की रसोई के बीच की दूरी अब पहले जितनी लंबी नहीं रही.
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